डॉ0 सत्य प्रकाश शुक्ल
प्राचार्य संदेश -
सत्यं सत्सु सदा धर्मः सत्यं धर्मः सनातनः।
सत्यमेव नमस्येत सत्यं हि परमा गतिः।।
सत्यं धर्मस्तपो योगः सत्यं ब्रह्म सनातनम् |
सत्य॑ यज्ञः परः प्रोक्तः सर्व सत्ये प्रतिष्ठितम् ||
"सत्पुरुषों में सदा सत्यरूप धर्म का ही पालन हुआ है। सत्य ही सनातन धर्म है। सत्य को ही सदा सिर झुकाना चाहिये, क्योंकि सत्य ही जीव की परमगति है। सत्य ही धर्म, तप और योग है, सत्य ही सनातन ब्रह्म है, सत्य को ही परम यज्ञ कहा गया है तथा सब कुछ सत्य पर ही ठिका हुआ है। "
माँ तमसा की गोद में स्थापित इस महाविद्यालय परिसर में प्रवेशित एवं नवागन्तुक छात्र/छात्राएँ इस बाग के सुन्दर पुष्प की भाँति हैं। सबको प्रेम-व्यवहार बनाये रखना चाहिये तथा रागद्वेष से दूर रहना चाहिये, जिससे समाज, देश और समस्त संसार में शान्ति का स्थायी भाव स्थापित हो और हम निर्बाध रूप से प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुये अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।