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विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव
यद् भद्रं तन्न आ सुव (ऋग्वेद- 5/82/5)

समस्त संसार को उत्पन्न करने वाले सृष्टि के पालन व संहार करने वाले सम्पूर्ण विश्व को अपने तेज से प्रकाशित करने वाले एवं जगत को शुभ कर्मो में प्रवृत्त करने वाले सविता देव हमसे हमारे सम्पूर्ण पापों एवं दुःखों को दूर कर सदा सभी का कल्याण करने वाले है। इसी मंत्र को लक्ष्य मानकर महाविद्यालय का प्रतीक तैयार किया गया है। जिस प्रकार से आदित्य अंधकार से लड़ते हुए अपने मार्ग में पड़ने वाले अवरोधों को चीरते हुए प्रातःकाल अपनी लालिमा से सम्पूर्ण जगत को आलोकित करतें हुए सृष्टि में नवसंचार पैदा करते हैं उसी प्रकार इस विद्या के मन्दिर में प्रवेशित छात्र अपने अज्ञान को दूर कर अपनी ज्ञान की रश्मि से सम्पूर्ण समाज को नई दिशा दें और नव प्रकाश फैलाते हुए लोगो में नवीन चेतना का संचार करें यही हमारा लक्ष्य है।

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सत्यं सत्सु सदा धर्मः सत्यं धर्मः सनातनः।
सत्यमेव नमस्येत सत्यं हि परमा गतिः।।
सत्यं धर्मस्तपो योगः सत्यं ब्रह्म सनातनम् |
सत्य॑ यज्ञः परः प्रोक्तः सर्व सत्ये प्रतिष्ठितम् ||

"सत्पुरुषों में सदा सत्यरूप धर्म का ही पालन हुआ है। सत्य ही सनातन धर्म है। सत्य को ही सदा सिर झुकाना चाहिये, क्योंकि सत्य ही जीव की परमगति है। सत्य ही धर्म, तप और योग है, सत्य ही सनातन ब्रह्म है, सत्य को ही परम यज्ञ कहा गया है तथा सब कुछ सत्य पर ही ठिका हुआ है। "

माँ तमसा की गोद में स्थापित इस महाविद्यालय परिसर में प्रवेशित एवं नवागन्तुक छात्र/छात्राएँ इस बाग के सुन्दर पुष्प की भाँति हैं। सबको प्रेम-व्यवहार बनाये रखना चाहिये तथा रागद्वेष से दूर रहना चाहिये, जिससे समाज, देश और समस्त संसार में शान्ति का स्थायी भाव स्थापित हो और हम निर्बाध रूप से प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुये अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।

डॉ0 सत्य प्रकाश शुक्ल
प्राचार्य
बी.एम.जी. डिग्री कॉलेज
बघेड़ा, करछना, प्रयागराज